देशराज्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति का संघर्ष, संकल्प और सफलता की ऐतिहासिक गाथा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति का संघर्ष, संकल्प और सफलता की ऐतिहासिक गाथा

नई दिल्ली, [20 जून] — भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का जीवन एक ऐसी अद्वितीय प्रेरणा है, जो न केवल महिलाओं, बल्कि समाज के सबसे वंचित तबकों के लिए भी आशा और आत्मबल का प्रतीक बन चुकी है। आदिवासी पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचना उनके संघर्ष, समर्पण और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है।

श्रीमती मुर्मू जी का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से संथाल आदिवासी गांव में हुआ। आर्थिक सीमाएं और सामाजिक चुनौतियां उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहीं, लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी दृढ़ निष्ठा ने उन्हें जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने की शक्ति दी। उन्होंने भुवनेश्वर के रामदेवी महिला कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और एक शिक्षक के रूप में समाज सेवा की शुरुआत की।

उनकी राजनीतिक यात्रा 1997 में शुरू हुई, जब वे रायरंगपुर नगर पंचायत की पार्षद चुनी गईं। इसके बाद वे ओडिशा विधानसभा की दो बार सदस्य रहीं और राज्य सरकार में मंत्री पद पर भी कार्यरत रहीं। उन्होंने झारखंड की राज्यपाल के रूप में भी ऐतिहासिक कार्यकाल निभाया।

2022 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें भारत के राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि नए भारत की सामाजिक चेतना का उद्घोष था। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसी आदिवासी महिला को इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अवसर मिला।

श्रीमती मुर्मू का चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया से कहीं बढ़कर था—यह ‘सशक्त नारी, सशक्त राष्ट्र’ की भावना को मूर्त रूप देने वाली ऐतिहासिक पहल थी। उनके जीवन ने यह सिद्ध किया कि अगर आत्मबल, शिक्षा और संकल्प हो, तो कोई भी पृष्ठभूमि सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

आज, जब देश उनकी जन्मतिथि मना रहा है, यह केवल एक बधाई नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रतिपादित मूल्यों, विचारों और सेवा भावना को प्रणाम करने का अवसर है। उनका जीवन हर भारतीय को यह विश्वास देता है कि नया भारत अब वास्तव में समावेशी, न्यायपूर्ण और सशक्त बन रहा है।

NCT

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!